अंग्रेजी की पैंठ
अंग्रेजी की पैंठ लगी है,
भारत के कस्बे गॉंवों में;
हाय बाय मम्मी डैडी,
सुन्दरी सुरा दिखतीं राहों में।
गौण हुए सब देव देवियां,
पर्व तीज सब बिसराये हैं;
केक बर्थडे वैलेन्टाइन, गूंज रहे हैं अंधियारों में।
Hindi Poetry written by me at various times and in various moods.
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