प्रेरणा के बिना कुछ भी हो नहीं पाता सरल है,
प्रेरणा से मनुज पी जाता सहज में ही गरल है;
प्रेरणा वैराग्य का अनुराग का कारण सकल है,
प्रेरणा से प्रेम में होता विरह में मन विकल है।
प्रेरणा से शब्द, कविताएं, सकल रचनाएं बनतीं,
भाग्य में हो तो कभी रचनाओं से है कीर्ति मिलती;
कीर्ति किन्तु प्रेरणा का स्रोत बन जाए कवि का,
कीर्ति के बिन नई रचनाएं न बनतीं।
आओ रे मन नई रचनाएं बनाएं
कीर्ति को रचानाओं के आड़े न लाएं
भाग्य में होगा तभी कीर्ति मिलेगी
बन्द होंगी अन्यथा सम्भाबवनाएं॥
Saturday, February 7, 2009
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Blog Archive
About Me
- डॉ. जय प्रकाश गुप्त
- डॉ. जय प्रकाश गुप्त शिक्षा- चिकित्सा- स्नातक (महर्षि दयानन्द विश्वविद्यालय रोहतक) पर्यावरण (Environmental Education)- परास्नातक (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र) पत्रकारिता (Journalism & Mass Comm)- परास्नातक (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र) PGDT (KUK) चिकित्सकीय वृत्त- Intern- श्री मस्तनाथ सामान्य चिकित्सालय, अस्थलबोहर (रोहतक), सामान्य अस्पताल, अम्बाला छावनी | चिकित्साधिकारी (पूर्व)- जनलाभ धर्मार्थ चिकित्सालय, अम्बाला छावनी, सेवा भारती चिकित्सालय अम्बाला छावनी | चिकित्सक- भगवान महावीर धर्मार्थ चिकित्सालय, अम्बाला छावनी, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अम्बाला छावनी | लेखकीय वृत्त- संपादन- महाविद्यालय पत्रिका (आयुर्वेद प्रदीप)- छात्र संपादक (English Section), INTEGRATED MEDICINE (Monthly Medical Magazine) प्रकाशन- कविता- लेख- कहानी- व्यंग्य अनेकों पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशित; चिकित्सा, शिक्षा, धर्म, संस्कृति, मनोविज्ञान विषयक १६ शोधपत्र प्रकाशित | समीक्षा- अनेकों कविता संग्रह, लेखमाला ग्रंथों की समीक्षा | अमृतकलश चिकित्सालय, हाऊसिंग बोर्ड कालोनी, अम्बाला छावनी | ईमेल- chikitsak@rediffmail.com, c
1 comment:
मात्र प्रेरणा ही नहीं अपितु आपका आत्मचिंतन भी आपको प्रेरित करता है ,इसलिए स्वयं पर विश्वास करें और नया सृजन भी ......
मेरी शुभकामनाएं ...
Post a Comment